Friday, June 17, 2011

anna hajare , baba ram dev v/s kendra sarkar ki samvedna


नमस्कार मित्रो
                       एक बात मेरे दिमाग मैं कोंध रही है की बाबा रामदेव के आन्दोलन को कुचलने के बाद सरकार अति उत्साह से भरी है , लोकपाल बिल के बारें मैं जानने वाले लोग देश मैं बहुत कम हैं ,जब कि भ्रष्टचार की बात को समझ ने वाले लोग बहुत थे , फिर भी केंद्र सरकार ने बाबा राम देव के आन्दोलन को कुचलने  की हिमाकत कर दी , अन्ना हजारे जी को भी अब सरकार इसे ही निपटने के चक्कर मैं डोल रही है, धमकियाँ दे रही है कि या तो मन जाओ नहीं तो हम खुद ही बिल ड्राफ्ट कर लेंगे ! बाबा राम देव को  अन्ना हजारे के विरुद्ध उपयोग करने की चाल जो केंद्र ने चली वो फेल हो गयी तो रामदेव के आन्दोलन को कुचल दिया गया , बाबा रामदेव से कहा गया  
अन्ना आप के मंच पर नहीं आने चाहिए , आप प्रधानमंत्री और न्यायाधीशों को लोकपाल से बाहर रखने की सरकार की बात का समर्थन कर दो ,हम आप की मांगें मन लेंगे , बाबा सियासत के मैदान मैं मैं नए हैं , मन गए ,बयान भी दे दिया, पर सरकार मैं बैठे लोग भी घाघ हैं ,अपना कम निकलने पर बाबा को दूध से मख्खी की तरह निकल फैका , अन्ना के साथ इस प्रकार की घटना करने की पूरी आशंका है, कल आज तक पर अन्ना की बात सूनी , १६ अगस्त से अनशन की बात सरकार पचा नहीं परही है , इस लिए सावधानी से ही अनशन को सफल बनाया जा सकता है 
                                                                                                 जय हिंद 

anshan or sarkar ki asavendan sheelta


नमस्कार मित्रो 
                        स्वामी निगमानंद की अनशन के दोरान हुई म्रत्यु इस बात का प्रमाण है की अब सरकारों पर अनशन का कोई असर नहीं होता , चाहे सरकार बी एस पी की हो , भा पा की हो या कांग्रेश की हो ,सब एक ही थाली के चाटते है ,इन को आम आदमी से कोई लेना देना नहीं , स्वामी रामदेव के अनशन के रामलीला मैदान मैं जो घटना हुई उन पर उत्तराँचल सरकार ने कहा था की बाबा यहाँ अनशन कर सकते हैं , तो क्या बाबा रामदेव जी को निगमानंद जी की तरह शहीद कर देते , समय रहते जिस तरह बाबा रामदेव को अस्पताल ले जाया गया क्या उसी तरह से निगम नन्द को नहीं लेजाया जा सकता था
                  दूसरी बात मिडिया की कीजाय तो अन्ना हजारे ,बाबा रामदेव प्रसिद्ध थे तो मिडिया ने कवर किया ,टी आर पी बड़ाई ,पैसा कमाया , किसी मंत्री ,मुख्य मंत्री की कुतिया भी मर जाये तो पूरा मिडिया उसे ब्रेकिंग खबर के रूप मैं दिखाना चालू कर देता है ,तो क्या मिडिया का फर्ज नहीं था की निगमा नन्द के अनशन की खबर प्रकाशित ,प्रसारित कर समर्थन दिया जाता . या कोई आन्दोलन खड़ा किया जाता , या निगमा नन्द के मरने के बाद जो खबर दिखाई जा रही है वो पहले नहीं दिखाई जा सकती थी ,
           सोचिये और अपनी बात रखना सीखो 
                                                                                      जय हिंद